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स्प्लिट टनलिंग: फायदे और नुकसान

Understand split tunneling technology: how it works, when to use it, and the security implications.

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स्प्लिट टनलिंग क्या है?

स्प्लिट टनलिंग आपको चुनने देती है कि कौन से ऐप्स VPN के माध्यम से रूट होते हैं और कौन से सीधे कनेक्शन उपयोग करते हैं। क्या संरक्षित है इसपर विस्तृत नियंत्रण।

स्प्लिट टनलिंग कैसे काम करती है

नेटवर्क स्तर पर रूटिंग नियम। VPN ऐप नियमों के विरुद्ध अनुरोधों की जाँच करता है। नामित ट्रैफिक VPN के माध्यम से एन्क्रिप्ट होता है; बाकी बायपास करता है। इनक्लूजन-आधारित या एक्सक्लूजन-आधारित मोड।

स्प्लिट टनलिंग के फ़ायदे

फ़ायदे: बैंडविड्थ संरक्षित करता है, लोकल नेटवर्क डिवाइस एक्सेस की अनुमति देता है, एक साथ लोकल और VPN-संरक्षित सेवाएँ सक्षम करता है।

विचार करने योग्य सुरक्षा जोखिम

जोखिम: बायपास किया गया ट्रैफिक असुरक्षित, ISP इसे देख सकता है, असली IP उजागर, बाहर किए गए ऐप्स से संभावित DNS लीक, गलत कॉन्फ़िगरेशन जोखिम।

स्प्लिट टनलिंग कब उपयोग करें

उपयोग के मामले: रिमोट वर्कर्स काम के ऐप्स कॉर्पोरेट VPN के माध्यम से रूट करते हैं, ब्राउज़िंग सुरक्षित रखते हुए लोकल नेटवर्क एक्सेस, केवल टॉरेंट क्लाइंट VPN के माध्यम से, गेमर्स वॉइस चैट सुरक्षित करते हैं।

सेटअप: सेटिंग्स में स्प्लिट टनलिंग ढूंढें, ऐप्स जोड़ें। अलग IP दिखाने वाले अलग ब्राउज़रों से टेस्ट करें।

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